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नई दिल्ली3 घंटे पहले

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योग गुरु बाबा रामदेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ्री वैक्सीनेशन के ऐलान और वैक्सीनेशन ड्राइव के डीसेंट्रलाइजेशन के फैसले की सराहना भी की। -फाइल फोटो

एलोपैथी से इलाज को सबसे बड़ा झूठ बताकर विवादों में घिरे बाबा रामदेव ने यू-टर्न ले लिया है। उन्होंने जल्द ही वैक्सीन लगवाने का ऐलान किया है। साथ ही कहा है कि सभी लोग जल्द से जल्द वैक्सीन लगवा लें। रामदेव बोले कि सभी अच्छे डॉक्टर्स भगवान के भेजे दूत हैं।

रामदेव ने कहा कि लोगों को योगा और आयुर्वेद भी अपनाना चाहिए। ये दोनों चीजें बीमारियों के खिलाफ कवच का काम करेंगी और कोरोना के चलते होने वाली मौतों में भी कमी आएगी।

अब बाबा ने की डॉक्टरों की तारीफ की
रामदेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ्री वैक्सीनेशन के ऐलान और वैक्सीनेशन ड्राइव के डीसेंट्रलाइजेशन के फैसले की सराहना भी की। बोले- 21 जून से देश के हर नागरिक का वैक्सीनेशन मुफ्त किया जाएगा, प्रधानमंत्री मोदी ने ये ऐतिहासिक ऐलान किया है। हम किसी भी संस्थान के साथ शत्रुता नहीं रख सकते हैं। सभी अच्छे डॉक्टर्स भगवान के भेजे हुए दूत हैं। ये इस पृथ्वी के लिए एक तोहफा हैं। लेकिन, अगर कोई डॉक्टर होते हुए भी गलत काम करता है तो ये उस व्यक्ति की ही गलती है।

बाबा ने बताया कि उनका दुश्मन कौन
प्रधानमंत्री जन औषधि स्टोर्स इसलिए खोले गए, क्योंकि ड्रग माफियाओं ने दुकानें खोल लीं और गैरजरूरी दवाएं मनमानी और ऊंची कीमतों पर बेचने लगे। वो बेसिक और जरूरत की दवाएं नहीं बेचते। हमारी लड़ाई देश के डॉक्टरों के साथ नहीं है। हम ये चाहते हैं कि किसी को भी दवा के नाम पर परेशान न होना पड़े। गैरजरूरी दवाओं से लोगों को बचाया जाए। इमरजेंसी केसों और सर्जरी के लिए एलोपैथी से बेहतर कुछ नहीं है, इसमें कोई शक नहीं। पर आयुर्वेद लाइलाज बीमारियों को दूर करता है।

बाबा रामदेव के ऐलोपैथी पर दिए बयान से मचा बवाल

  • हाल ही में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने योग गुरु बाबा रामदेव पर एलोपैथी इलाज के खिलाफ झूठ फैलाने का आरोप लगाया था।
  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को लिखे पत्र में IMA ने कहा था कि सोशल मीडिया पर रामदेव का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें बाबा एलोपैथी को बकवास और दिवालिया साइंस कह रहे हैं। इसके बाद IMA ने रामदेव को एक लीगल नोटिस भेजा था। डॉक्टर्स की संस्था ने रामदेव पर मुकदमा चलाने की मांग भी की थी।
  • IMA ने पत्र में लिखा था कि इससे पहले कोरोना के लिए बनाई गई अपनी दवा की लॉन्चिंग के दौरान भी रामदेव ने डॉक्टर्स को हत्यारा कहा था। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री भी मौजूद थे।
  • इसके बाद रामदेव की संस्था पतंजलि ने बयान जारी कर आरोपों को गलत बताया था। पतंजलि ने कहा था कि मॉडर्न साइंस और उसकी प्रैक्टिस करने वाले लोगों के प्रति बाबा रामदेव कोई दुर्भावना नहीं रखते हैं। IMA ने उन पर जो आरोप लगाए हैं, वे गलत हैं।
  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने चिट्‌ठी लिखकर बाबा रामदेव से बयान वापस लेने के लिए कहा। हर्षवर्धन ने कहा था कि एलोपैथी से जुड़े हेल्थ वर्कर्स और डॉक्टर बहुत मेहनत से कोरोना मरीजों की जान बचा रहे हैं। आपके बयान से कोरोना के खिलाफ चल रही लड़ाई कमजोर पड़ सकती है। उम्मीद है कि आप अपने बयान को वापस लेंगे।
  • इस पर स्वास्थ्य मंत्री के पत्र का जवाब देते हुए रामदेव ने कहा कि वह इस मामले को शांत करना चाहते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि आपका पत्र प्राप्त हुआ। उसके संदर्भ में चिकित्सा पद्धतियों के संघर्ष के इस पूरे विवाद को खेदपूर्वक विराम देते हुए मैं अपना वक्तव्य वापस लेता हूं।
  • इसके बाद IMA ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर रामदेव की शिकायत की। पत्र में IMA ने कहा कि एक वीडियो में रामदेव ने दावा किया कि वैक्सीन की दोनों खुराक लेने के बाद भी 10,000 डॉक्टर और लाखों लोग मारे गए हैं। यह एकदम गलत डाटा है। उन पर देशद्रोह के आरोपों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। IMA के मुताबिक, कोरोना की पहली और दूसरी लहर में कुल 1266 डॉक्टर्स की जान गई।

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