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21 घंटे पहलेलेखक: न्यूयॉर्क से भास्कर के लिए मोहम्मद अली

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मिशन का लोगो। टिकट व मेडिकल उपकरण के लिए जुटाए 12 लाख रुपए

जैसे ही कोरोना से भारत भर में सामूहिक अंतिम संस्कार की खबरें फैलीं, यहां नर्सों के एक समूह ने भारत की मदद करने का संकल्प लिया। 100 से ज्यादा नर्सें नौकरी और परिवार छोड़कर भारत आ रही हैं। इनकी सरकार से वीसा और अन्य जरूरी मंजूरी को लेकर बातचीत चल रही है। कोशिश है कि 50 से अधिक नर्सों का पहला समूह जून के पहले हफ्ते में भारत पहुंच जाए। इस समूह को ‘अमेरिकन नर्स ऑन ए मिशन’ नाम दिया गया है।

यह आइडिया वॉशिंगटन में नर्स चेल्सिया वॉल्श का है। उन्होंने ‘ट्रेवेलिंग नर्स’ नाम के ग्रुप में भारत के अस्पतालों और सामूहिक अंतिम संस्कार की फोटो शेयर करते हुए लिखा, यह सब देखकर मेरा मन दुखी है और मैं भारत जाने के बारे में सोच रही हूं।’ वॉल्श भारत में एक अनाथालय में वालंटियर के तौर पर पहले भी सेवाएं दे चुकी हैं।

वे कहती हैं, ‘बीते हफ्ते इस पोस्ट के बाद से मेरा फोन लगातार बज रहा है। कुछ दिनों में भारत की मदद के लिए पूरे अमेरिका भर की नर्सों ने संपर्क किया है। मुश्किल वक्त में भारत को मेडिकल पेशेवरों की जरूरत है। हम कुछ चमत्कारिक नहीं कर सकते, लेकिन अपना सबकुछ तो लगा ही सकते हैं। वॉल्श ‘मिशन इंडिया’ अभियान से जुड़ने की इच्छुक नर्सों को पहले चेतावनी भी देती है और उन्हें तमाम कठिनाइयां भी बताती हैं।

इस पर नर्सें कहती हैं कि हमें चुनौतियां मंजूर हैं। अपना ग्रुप बनाने के बाद टीम ‘टर्न योर कंसर्न इनटू एक्शन फाउंडेशन’ से जुड़ी है, जो भारत में इनके रुकने-ठहरने में सहयोग करेगा। भारत जा रहीं नर्स मोर्गन क्रेन कहती हैं कि अमेरिका में कोविड से लोगों की मौतों ने मुझे बदल दिया है। यह जितना चुनौतीपूर्ण था, मैं अंदाजा भी नहीं लगा सकती कि भारत के लोगों के लिए यह कितना मुश्किल वक्त है।

हम नौकरी, परिवार छोड़ कर दिल्ली जा रहे हैं। हम छोटे अस्थायी कोविड अस्पतालों में काम करेंगे। हमारा प्राथमिक ध्यान छोटे कमजोर अस्पतालों को चलाने पर है, जिनके पास संसाधन नहीं हैं। इसी टीम में हीथर फोर्टोफर भी हैं। वे कहती हैं कि मेरे दोस्तों ने मुझे न जाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि दान और मेडिकल उपकरण भेजकर भी मदद की जा सकती है। मैंने कहा, यह हर कोई कर सकता है। लेकिन, हर कोई वहां जा नहीं सकता है।

हीथर दो साल पहले रिटायर हुई थीं, लेकिन बीते साल जब अमेरिका कोविड की चपेट में आया तो वे काम पर लौट आई थीं। तब से अमेरिका में उन जगहों पर जा रही हैं, जहां नर्सों की कमी है। इससे पहले वे कभी दूसरे देश नहीं गई हैं। फ्लोरिडा की नर्स जेनिफर पकेट बाल चिकित्सा और नवजात आईसीयू मामलों में एक्सपर्ट हैं। वे कहती हैं, ‘मेरे पास खास स्किल है, हम हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठ सकते हैं। इस स्किल की अभी दूसरों को जरूरत है। पकेट लंबी ड्यूटी के बाद एक हफ्ते पहले ही घर लौटी थीं। कहती हैं कि अभी भारत को मेरी जरूरत है।

टिकट व मेडिकल उपकरण के लिए जुटाए 12 लाख रु.
यह टीम निशुल्क सेवाएं देगी और अपना खर्च भी खुद उठाएगी। कुछ नर्स बड़े खर्चे जैसे ट्रैवल (6 लाख रु. राउंड ट्रिप) का खर्च नहीं उठा सकतीं, इसलिए इन्होंने क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म गोफंडमी में ‘अमेरिकन नर्सेज ऑन ए मिशन टू इंडिया’ नाम से याचिका लगाई। लक्ष्य 50 हजार डॉलर (36.6 लाख रुपए) जुटाने का है। टीम रविवार तक 12 लाख रुपए जुटा चुकी थी।

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