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नई दिल्ली22 मिनट पहलेलेखक: रवि यादव

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  • डॉ. त्रिखा का मानना कि वैक्सीनेशन में भी थोड़ा सख्ती बरतने की जरूरत है
  • देश में कोरोना की दूसरी लहर में इन्फेक्शन रेट ज्यादा, लेकिन मृत्यु दर कम है

देश में कोरोना की दूसरी लहर घातक होती जा रही है। ज्यादातर अस्पतालों के ICU बेड फुल हो गए हैं। वैक्सीन लगवाने को लेकर भी लोग बहुत जागरूक नजर नहीं आ रहे हैं। AIIMS दिल्ली में प्रोफेसर और कोरोना मेडिकल मैनेजमेंट के चेयरपर्सन डॉक्टर अंजन त्रिखा कहते हैं, ‘कोरोना की दूसरी लहर की वजह जनता खुद है। लोगों ने मास्क और दो गज दूरी के नियम को मानना छोड़ दिया, जिसके कारण केस बढ़ रहे हैं।’ देश में कोरोना की स्थिति को लेकर दैनिक भास्कर ने डॉक्टर त्रिखा से बातचीत की। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश…

मौजूदा समय में कोरोना की क्या स्थिति है?

इस समय मरीज बड़ी संख्या में आ रहे हैं। मरीजों में डॉक्टरों की भी संख्या अच्छी-खासी है। मास्क के प्रति लापरवाही की वजह से केस बहुत ज्यादा आ रहे हैं। ऐसे भी लोग बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं, जिनके घरों में जगह कम है और वे वहां आइसोलेट नहीं रह सकते। हमारे ICU इस समय पूरी तरह से फुल हैं।

अभी तक सिर्फ 5 से 6% लोगों का वैक्सीनेशन हुआ है। इस रफ्तार से कब तक कोरोना पर काबू पाया जा सकता है।

सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि वैक्सीन लगवाने के तुरंत बाद किसी को कोरोना नहीं होगा। ये सही नहीं है। वैक्सीन का दूसरा डोज लगवाने के बाद ही हमारे शरीर में कोरोना से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनती है, लेकिन लोग वैक्सीन लगवाने के तुरंत बाद पार्टी कर रहे हैं। पूरे देश में मास्क और दो गज दूरी को लेकर सतर्कता कम हुई है। इससे हालात बिगड़ रहे हैं। 45 साल से ज्यादा उम्र वालों को तुरंत वैक्सीन लगवानी चाहिए।

कोरोना की दूसरी लहर कितनी घातक है?

दूसरी वेव में इन्फेक्शन रेट ज्यादा है। मरीज आ रहे हैं, लेकिन मरीजों के मरने की संख्या पहले की तुलना में कम है। अब डॉक्टरों को इस बीमारी को संभालना आ गया है। पहले यह नई बीमारी थी, सब इंटरनेट पर देखते थे, लेकिन अब जल्द टेस्ट हो जाता है और मरीज को समय से इलाज मिलने लगता है।

दिल्ली के हालात पर क्या कहेंगे? यहां हर रोज अस्पतालों में मरीज बढ़ रहे हैं।

दिल्ली में कोरोना के अलावा दूसरी बीमारियों का इलाज बंद करना पड़ेगा। तभी कोरोना के मरीज भर्ती होंगे। अगर हर हस्पताल में कोरोना के 20 बेड हैं और 100 बेड अन्य मरीजों के हैं तो 20 बेड तो एक ही दिन में भर जाते हैं। बाकी बीमारियों के मरीजों को वीडियो कॉल पर देखा जाए। जरूरी सर्जरी व इमरजेंसी वाली बीमारियों के लिए ही अस्पताल आएं।

क्या आने वाले समय के लिए एम्स के पास ICU की व्यवस्था है?

हर रोज सुबह हमारी इस पर मीटिंग होती है। हम हरियाणा के झज्जर जिले में एम्स पार्ट टू को मरीजों के लिए जल्द खोलेंगे। जो कम गंभीर मरीज हैं, उनको हम वहां भेजेंगे। वहां पर एक हजार मरीजों की व्यवस्था है। ये काम अगले दो-तीन दिन में हो जाएगा, जिससे स्थिति संभल जाएगी।

भारत सरकार कोरोना को लेकर जो कदम उठा रही है, क्या वो पूरी तरह से सही हैं?

मेरी व्यक्तिगत राय है कि भारत सरकार ने बहुत अच्छे से पूरे मामले को संभाला है। देश में दूसरी लहर इसलिए आई क्योंकि लोग लापरवाही कर रहे हैं। जनता ने सावधानियां रखनी बंद कर दीं। भारत सरकार कोरोना से लड़ने के लिए जो कर सकती थी, वो पहले भी किया और अब भी कर रही है। पहले एक भी कोरोना की दवाई नहीं मिलती थी, अब सभी दवाइयां मुफ्त मिल रही हैं। हमारे यहां जो मरीज भर्ती होता है, उसे खाने-पीने के साथ सभी महंगी दवाइयां मुफ्त मिलती हैं।

क्या कोरोना को काबू करने के लिए फिर लॉकडाउन लगाना चाहिए?

हमने पहले जो लॉकडाउन किया था, उससे हमें फायदा हुआ, उसमें हमने ICU बेड बनाए और हॉस्पिटलों में व्यवस्था की। लोगों को जागरूक किया। लॉकडाउन अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। पूरे देश में लॉकडाउन के बजाय हमें उन जगहों पर लॉकडाउन करना चाहिए, जहां मरीज तेजी से बढ़ रहे हों। जैसे कि सोसाइटी, कॉलोनी, गली, सेक्टर को चिन्हित करना चाहिए और वहां सख्ती करनी चाहिए।

आपके अनुसार देश को कोरोना से छुटकारा कैसे मिल सकता है?

हम मास्क पहनें और बीमारी फैलने से रोकें। लोग वैक्सीन लगवाना शुरू करें। वैक्सीन लगवाने में सख्ती नहीं की जा रही है। 15 दिन पहले हमारे अस्पताल में सिर्फ 28 मरीज थे, हम खुश थे कि कोरोना खत्म हो गया, लेकिन फिर संख्या तेजी से बढ़ी। अगले दो हफ्ते में पता चलेगा कि कोरोना की दूसरी लहर कहां तक जाएगी।

क्या जनता नहीं संभली तो हालात बेकाबू हो सकते हैं?

दूसरी लहर में केस बढ़ने के बाद अब जनता फिर डर रही है। ये बात जनता के लिए लाभदायक है। लोग खुद जितनी सतर्कता रखेंगे, उतनी ही जल्दी हालात काबू में होंगे।

आप कोरोना को लेकर लोगों को कुछ सलाह, संदेश देना चाहेंगे?

वैक्सीन जरूर लगवाएं और मास्क पहनें। अगर जुकाम-बुखार है तो घर पर आराम करें। लोगों को लगता है कि मौसम में बदलाव के कारण ऐसा है और वह लापरवाही करते हैं, लेकिन ऐसे में घर पर ही रहें और टेस्ट करवाएं। इतनी सी एहतियात कोरोना की रफ्तार कम कर देगी।

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