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मॉस्कोएक घंटा पहले

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पुतिन पहली बार 7 मई 2000 को राष्ट्रपति बने थे। उनका पिछला कार्यकाल 2008 में पूरा हुआ था।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार को उस कानून पर साइन किए, जो उन्हें 2036 तक सत्ता में बने रखने ताकत देता है। इसके साथ ही पुतिन को राष्ट्रपति पद पर अन्य दो कार्यकाल तक बने रहने की मंजूरी मिल गई है।

68 साल के पुतिन पिछले दो दशक से ज्यादा समय से रूस की सत्ता में हैं। सरकार के लीगल इंफॉरमेशन पोर्टल पर जारी की गई एक कॉपी के मुताबिक, पुतिन के हस्ताक्षर के बाद अब वह 2024 में वर्तमान कार्यकाल पूरा होने के बाद अगले चुनावों में भी खड़े हो सकेंगे।

76% लोगों ने समर्थन किया था
पिछले साल रूस में संविधान संशोधन के लिए जनमत संग्रह अभियान भी चलाया गया था। यह 7 दिन तक चला था। कोरोना संकट के कारण पहली बार रूस में किसी वोटिंग में इतना वक्त लगा। हालांकि, वोटिंग ऑनलाइन हुई। करीब 60% वोटरों ने मतदान किया। रूस की जनता ने पुतिन को 2036 तक पद पर बनाए रखने के समर्थन और विरोध में वोट दिए थे। इसके मुताबिक 76% लोगों ने संविधान में संशोधन का समर्थन किया था।

पुतिन पहली बार 2000 में राष्ट्रपति बने थे
पुतिन पहली बार 7 मई 2000 को राष्ट्रपति बने थे। उनका पिछला कार्यकाल 2008 में पूरा हुआ था। इसके बाद मेदवेदेव राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे और पुतिन प्रधानमंत्री बने थे। हालांकि, सरकार की असल कमान पुतिन के हाथों में थी। मेदवेदेव के राष्ट्रपति रहने के दौरान राष्ट्रपति का कार्यकाल 6 साल कर दिया गया था। इससे पहले यह 4 साल का हुआ करता था। 2012 में एक बार फिर से पुतिन राष्ट्रपति बने और मेदवेदेव प्रधानमंत्री चुने गए। इस दौरान देश में कई बदलाव देखने को मिले। इसके साथ ही राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने खुद को बेहद मजबूत बनाया।

रूसी संसद के निचले सदन में आया था प्रस्ताव
पुतिन का कार्यकाल 2024 में खत्म हो रहा है। अगर संविधान संसोधन नहीं होता, तो पुतिन इस बार चुनाव नहीं लड़ पाते। इसके लिए रूसी संसद के निचले सदन ड्यूमा में पुतिन की टर्म बढ़ाने को लेकर प्रस्ताव लाया गया था। संसद में यह प्रस्ताव सांसद वेलेंतीना तेरेश्कोवा लाई थीं। वे 1963 में अंतरिक्ष में जाने वाली पहली महिला हैं। वे पुतिन की समर्थक मानी जाती हैं।

15 साल तक जासूस के रूप में काम किया
रूस की खुफिया एजेंसी केजीबी के जासूस के रूप में उन्होंने विदेश में 15 साल तक काम किया। जब रूस के पूर्व राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने 1999 में अचानक इस्तीफा दिया, तब पुतिन देश के प्रधानमंत्री थे। उस समय लंबित चुनावों के बीच उन्हें कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में नामित किया गया।

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