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मुंबई7 मिनट पहले

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एंटीलिया केस में गिरफ्तार सचिन वझे 7 अप्रैल तक NIA कस्टडी में है।

एंटीलिया के बाहर से बरामद जिलेटिन से भरी स्कॉर्पियो मामले और इसके मालिक मनसुख हिरेन की हत्या की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी(NIA) को कई सबूत हाथ लगे हैं। NIA के मुताबिक, वझे की अवैध वसूली के काले कारोबार में पुलिस और प्रशासन के कुछ आलाधिकारी भी शामिल थे। NIA के हाथ वझे द्वारा इनको किए भुगतान के दस्तावेज लगे हैं। यह दस्तावेज दक्षिण मुंबई के गिरगांव स्थित एक क्लब पर की गई छापेमारी के दौरान बरामद हुए हैं। बता दें कि सचिन वझे 7 अप्रैल तक एनआईए की हिरासत में है।

NIA को जो दस्तावेज बरामद हुए हैं, उनमें एक दस्तावेज में वझे द्वारा एक महीने में किस ऑफिस और ऑफिसर को कितना भुगतान किया गया, इसका जिक्र है। हर नाम के सामने भुगतान की गई रकम लिखी हुई है। कुछ को भुगतान की गई रकम करोड़ों में है। NIA का मानना है कि यह रकम रिश्वत हो सकती है। दो निरीक्षक, एक पुलिस उपायुक्त, और एक डिप्टी कमिश्नर लेवल का पूर्व अधिकारी भी शामिल है। इनमें से तीन से NIA की टीम पूछताछ कर चुकी है।

NIA, CBI और ED को सौंप सकती दस्तावेज
राष्ट्रीय जांच एजेंसी इन दस्तावेजों को ED, CBI और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से साझा कर सकती है। जिसके बाद इस पूरे केस में कुछ और केंद्रीय जांच एजेंसीज की एंट्री हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, एनआईए ने क्लब के मालिक और वझे से जुड़े कुछ अन्य अधिकारियों से इस संबंध में जवाब भी तलब किया है। उनसे वझे द्वारा किए पैसे के भुगतान का स्पष्टीकरण मांगा गया है। NIA से जुड़े एक अधिकारी कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो दस्तावेज को आगे की जांच के लिए आयकर विभाग या सीबीआई के साथ साझा किया जाएगा, क्योंकि एनआईए को सिर्फ आतंकवाद रोधी मामलों की जांच करने की इजाजत है।

वझे के कहने पर शिंदे और गोरे को क्लब में मिली नौकरी
जांच में सामने आया है कि गिरगांव स्थित क्लब में वझे का अक्सर आना-जाना था। वझे के कहने पर नरेश गौर और पूर्व कांस्टेबल विनायक शिंदे को यहां नौकरी भी दी गई थी। दोनों मनसुख हिरेन की हत्या मामले में गिरफ्तार हैं और फिलहाल NIA की कस्टडी में हैं।

शिंदे के पास था भांडुप और मुलुंड इलाके की वसूली का जिम्मा
‘एक्सटॉर्शन डायरी’ और मोबाइल से मिले यह सबूत यह बताते हैं कि विनायक शिंदे को सचिन वझे ने भांडुप, मुलुंड के 32 क्लब, बार और लॉज से अवैध वसूली का जिम्मा सौंपा था। हर वसूली पर शिंदे का कमीशन बंधा हुआ था। जांच में यह भी सामने आया है कि सचिन वझे ऐसे लोगों से भी वसूली करता था, जिनके खिलाफ मुंबई क्राइम ब्रांच में कंप्लेंट आई थी।

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