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अम्मानएक घंटा पहले

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जॉर्डन के शाही परिवार में सत्ता के लिए घमासान छिड़ता नजर आ रहा है। यहां उप-प्रधानमंत्री अयमान सफादी ने रविवार को बताया कि जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला के सौतेले भाई और पूर्व शासक प्रिंस हमजा ने विदेशी ताकतों के साथ मिलकर देश को अस्थिर करने की साजिश रची।

इससे पहले शनिवार को मिलिट्री की ओर से कहा गया था कि हमने प्रिंस को पहले ही चेतावनी दी थी कि वे जॉर्डन के अहम सहयोगी अमेरिका के रिश्तों को टारगेट न करें और ऐसा कोई भी कदम न उठाएं, जिससे दोनों देशों की सुरक्षा और स्थायित्व के लिए खतरा पैदा हो। इसके बाद हमजा ने दावा किया था कि उन्हें घर में ही नजरबंद कर लिया गया है। कई हाई-प्रोफाइल लोगों को भी हिरासत में लिया गया है।

जॉर्डन छोड़ने के लिए विदेशी एजेंसी से संपर्क किया
सफादी ने बताया, ‘जांच में हमने पाया कि विदेशी ताकतों के जरिए जॉर्डन को अस्थिर करने के लिए सही समय का इंतजार किया जा रहा था। इस दौरान हमने यह भी पता चला कि प्रिंस को जॉर्डन से बाहर ले जाने के लिए एक विदेशी इंटेलिजेंस एजेंसी ने उनकी पत्नी से भी संपर्क किया। उनके लिए विमान का इंतजाम किया जा रहा था।

साजिश में शामिल 14 से 16 लोग गिरफ्तार
उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि यह गतिविधियां और साजिशें उस लेवल तक पहुंच गई है, जिससे देश की सुरक्षा और स्थिरता पर सीधा असर पड़ रहा था। हालांकि किंग ने तय किया कि प्रिंस हमजा से सीधे बात करना और परिवार के भीतर इससे निपटाना ही सबसे सही तरीका होगा। उन्होंने बताया कि साजिश में शामिल करीब 14 से 16 लोगों को हिरासत में लिया गया है।

किंग हुसैन की मौत के बाद हमजा हुए अलग-थलग
1999 में किंग हुसैन की मौत के बाद प्रिंस हमजा को जॉर्डन के किंग के रूप में देखा जाने लगा। लेकिन, उन्हें किंग अब्दुल्ला की तुलना में कम अनुभवी बताया गया। यही वजह है कि जनता और पूर्व राजा की पहली पसंद होने के बावजूद प्रिंस हमजा जॉर्डन के किंग नहीं बन सके। इसके बाद से ही दोनों के बीच तनाव बढ़ गया।

2004 में हमजा से छीना ताज
2004 में किंग अब्दुल्ला ने प्रिंस हमजा बिन हुसैन के क्राउन प्रिंस की उपाधि वापस लेकर अपने बेटे को दे दी। इससे उस समय की महारानी क्रिनी नूर को सबसे बड़ा झटका लगा, जो प्रिंस हमजा को देश के अगले राजा के रूप में देखना चाहती थीं। हमजा आज भी जॉर्डन में काफी लोकप्रिय हैं।

अमेरिका-सऊदी ने किंग अब्दुल्ला का किया समर्थन
जॉर्डन के सहयोगी देश अमेरिका, सऊदी अरब और मिस्र ने खुलकर किंग अब्दुल्ला के प्रति समर्थन का ऐलान किया है। जॉर्डन, सऊदी अरब और मिस्र समेत अधिकतर सुन्नी बहुल देशों ने कई सालों से शिया बहुल ईरान के खिलाफ गठबंधन बनाए हुए हैं। जॉर्डन का अमेरिका के साथ भी मजबूत संबंध है, ईराक युद्ध के दौरान और इस्लामिक स्टेट के खिलाफ ऑपरेशन में जॉर्डन ने अमेरिका की खुलकर मदद की थी।

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