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  • Unemployment Rate Dropped To 6.52 Percent Last Month, It Was At 6.90 Percent In February

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एक घंटा पहले

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  • कोविड के चलते लॉकडाउन होने के बाद बेरोजगारी दर अप्रैल में 23.52% और मई में 21.73% थी
  • जनता की राय में लॉकडाउन के बजाय फिजिकल डिस्टेंस के अनुशासन के साथ टीकाकरण बेहतर

कोविड के कहर वाले वित्त वर्ष 2020-21 ने जाते-जाते रोजगार के मोर्चे पर एक अच्छी खबर दी है। पिछले महीने देश में बेरोजगारी का स्तर गिरकर 6.52% पर आ गया यानी 10,000 वर्कर में 652 बेरोजगार थे। फरवरी में बेरोजगारी का आंकड़ा 6.90% था। ये आंकड़े बिजनेस और इकोनॉमिक रिसर्च फर्म सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) ने जारी किए हैं।

शहरों में बेरोजगारी का लेवल 6.99% से बढ़कर 7.24% रहा

मार्च में बेरोजगारी में कमी के बीच एक निराश करने वाली भी खबर है। शहरों में बेरोजगारी का लेवल 7.24% रहा यानी 10,000 वर्कर में 724 बेरोजगार थे। फरवरी में यह आंकड़ा 6.99% यानी 10,000 में 699 का था। बेरोजगारी साल के पहले महीने में भी घटी थी। जनवरी में शहरों में बेरोजगारी 8.08% के लेवल पर थी जो दिसंबर के 8.84% से खासी कम रही थी।

ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी का लेवल घटकर 6.19% रह गया था

CMIE के मुताबिक, हालांकि मार्च में ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी का लेवल घटकर 6.19% यानी 10,000 वर्कर में 619 रह गया। फरवरी में बेरोजगारी दर 6.86% (10,000 वर्कर में 686) थी। CMIE के CEO महेश व्यास ने 29 मार्च को महाराष्ट्र में फिर से लॉकडाउन होने पर उसके असर की चर्चा की थी। उन्होंने कहा था, ‘बहुत से लोग कह रहे हैं कि लॉकडाउन समस्या का समाधान नहीं है।’

मनमाने से लॉकडाउन के बजाय फिजिकल डिस्टेंस के साथ टीकाकरण बेहतर

व्यास ने कहा था, ‘विज्ञान से हमें वायरस से बचाव का टीका मिला है। मनमाने तरीके से लॉकडाउन करने के बजाय फिजिकल डिस्टेंस का अनुशासन बनाए रखते हुए कारगर तरीके से टीकाकरण करते रहना बेहतर होगा।’ नए फाइनेंशियल ईयर के पहले दिन यानी 1 अप्रैल को कोविड संक्रमण के नए मामले 81,000 से ज्यादा हो गए थे, जो एक दिन में सबसे ज्यादा था। महाराष्ट्र में अकेले 43,000 से ज्यादा मामले आए थे, जो कोविड के बाद सबसे ज्यादा थे।

पिछले साल बेरोजगारी का लेवल अप्रैल में 23.52% और मई में 21.73% था

व्यास ने कहा था, ‘लॉकडाउन होने से रोजी-रोटी छिनने का खतरा बढ़ता है।’ पिछले साल जब कोविड पर रोकथाम के लिए पहली बार लॉकडाउन लगाया गया था, तब अप्रैल में बेरोजगारी का लेवल 23.52% था यानी 10,000 वर्कर में 2,352 बेरोजगार हो गए थे। मई में हालात थोड़े बेहतर हुए थे जिससे बेरोजगारी आंकड़ा 21.73% पर आया था। इस हिसाब से उस महीने 10,000 वर्कर में 2,173 बेरोजगार थे।

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