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पुणे5 घंटे पहले

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टीम इंडिया ने बेहद रोमांचक साबित हुए तीसरे वनडे मैच में इंग्लैंड को 7 रन से हराकर सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली। यह मैच रणनीति के लिहाज से भारत के लिए काफी अलग रहा। भारतीय टीम ने इस मुकाबले के लिए अपनी हाल-फिलहाल की स्ट्रैटजी को साइड में रखा और बिल्कुल ही नए तेवर के साथ उतरी। आखिरकार इस बदलाव का अंजाम सुखद रहा और विराट एंड कंपनी ने सैम करन की शानदार बल्लेबाजी और खराब फील्डिंग से उबरते हुए देशवासियों को होली के त्योहार पर जीत का उपहार दिया। तीसरे वनडे में भारत की जीत के पीछे पांच फैक्टर अहम रहे।

5. फास्ट बॉलिंग पर पूरा जोर

दूसरे वनडे में भारतीय टीम की हार की मुख्य वजह स्पिनर्स क्रुणाल पंड्या और कुलदीप यादव का फेल होना भी रहा था। उन दोनों ने 16 ओवर में 156 रन दिए थे। इसके पीछे बड़ी वजह वनडे में स्पिनर्स के खिलाफ इंग्लैंड की मौजूदा टीम का सबसे आक्रामक रवैया है। भारतीय टीम ने इस फैक्ट को समझा और चौथे वनडे में 4 फास्ट बॉलर्स और एक फास्ट बॉलिंग ऑलराउंडर (हार्दिक पंड्या) के साथ उतरी। स्पिनर के रूप में सिर्फ क्रुणाल पंड्या प्लेइंग इलेवन में थे, लेकिन उन्हें सिर्फ 4 ओवर फेंकने का मौका मिला।

यानी इंग्लैंड की पारी में भारत की ओर से 50 में से 46 ओवर फास्ट बॉलर्स ने डाले। 1983 के बाद से यह पहला मौका है जब भारत में हुए वनडे मैच में भारतीय टीम की ओर से 46 ओवर फास्ट बॉलर्स ने डाले हैं। 1983 में पाकिस्तान के खिलाफ लगातार दो वनडे मैच में ऐसा हुआ था।

4. सीरीज में पहली बार पावर प्ले में विकेट
इस सीरीज के पहले दो मुकाबले में भारतीय टीम इंग्लैंड की पारी के पावर प्ले में एक भी विकेट नहीं ले पाई थी, लेकिन तीसरे वनडे में भुवनेश्वर ने अपने पहले दो ओवर में ही इंग्लैंड के दोनों ओपनर्स को पवेलियन की राह दिखा दी। इसका नतीजा यह रहा कि इंग्लैंड की टीम पूरी पारी में दबाव में रही।

3. शार्दूल ठाकुर का ऑलराउंड प्रदर्शन
शार्दूल ठाकुर इस मैच में एक बार फिर टीम इंडिया के लिए संकट मोचक साबित हुए। जब भारतीय पारी लड़खड़ा रही थी, तब उन्होंने 30 रनों की उपयोगी पारी खेली। इसके बाद इंग्लैंड की पारी में चार विकेट लेकर भारतीय जीत की राह आसान की। कप्तान विराट को जब भी ब्रेक थ्रू की जरूरत हुई, उन्होंने शार्दूल की ओर रुख किया और शार्दूल ने ज्यादातर मौकों पर कप्तान की डिमांड पूरी की।

2. तेज ओपनिंग साझेदारी

सीरीज के पहले दो वनडे मैचों में भारतीय पारी शुरुआत में काफी धीमी रही थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। भारत ने सतर्क शुरुआत की अपनी पुरानी स्ट्रैटजी से किनारा किया। रोहित और धवन ने सिर्फ 88 गेंदों पर 103 रनों की जोरदार साझेदारी कर भारत को तेज और मजबूत शुरुआत दी। यह आखिरकार भारत के बड़े स्कोर का आधार साबित हुई।

1. पंत और पंड्या का फायर पावर
दूसरे वनडे में जॉनी बेयरस्टो और बेन स्टोक्स ने अपनी पावर हिटिंग से भारतीय टीम को स्तब्ध कर दिया था। इस बार कुछ ऐसा ही ऋषभ पंत और हार्दिक पंड्या ने किया। भारतीय टीम बिना विकेट खोए 103 रन के स्कोर से चार विकेट पर 157 रन के स्कोर पर पहुंच गई। कमेंटेटर्स भी मान रहे थे कि पंत और पंड्या को रुक कर और संभलकर खेलना होगा, लेकिन इन दोनों ने 70 बॉल में 99 रन की साझेदारी कर भारत को 35 ओवर में ही 250 के पार पहुंचा दिया। इनकी पावर हिटिंग की बदौलत भारतीय टीम लगातार विकेट गंवाते रहने के बावजूद 329 तक पहुंच सकी।

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