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20 घंटे पहले

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प्रो. क्रिंगलबैक कहते हैं कि हमने क्यूटनेस को नापने मस्तिष्क स्कैनिंग की नई तकनीक विकसित की है, इसके जरिए न्यूरोइमेजिंग उपयोग कर मिली सेकंड से दिमाग की हरकतों की मैपिंग की। हम क्यूटनेस रेटिंग प्रणाली तैयार करने में कामयाब रहे। (सिंबॉलिक फोटो)

  • भाव पैदा करने वाला हिस्से के सक्रिय होते ही क्यूटनेस हमारे दिमाग को हैक कर लेती है

काेई मासूम आपकाे हद से प्यारा यानी क्यूट क्याें लगता है, इसका पता चल गया है। उनकी बड़ी-बड़ी आंखें, गोल-मटोल गाल और बटन जैसी नाक के साथ पाेपली हंसी और मुलायम त्वचा हमें इसलिए आकर्षित करती है, क्योंकि वयस्कों में ऑर्बिटोफ्रॉन्स्टल कॉर्टेक्स (दिमाग में भावनाओं को पैदा करने वाला हिस्सा) बहुत जल्दी सक्रिय हो जाता है। यह हिस्सा आंखों के ठीक पीछे होता है और बच्चे का चेहरा देखने के बाद सेकंड के सातवें भाग में ही जागृत हो जाता है, जिससे वे उनकी ओर खिंचे चले जाते हैं।

ऑक्सफाेर्ड के वैज्ञानिकाें ने न्यूरोइमेजिंग से पता लगाया है कि वयस्कों में ऑर्बिटोफ्रॉन्स्टल कॉर्टेक्स किस तरह काम करता है। यूनिवर्सिटी के न्यूरो साइंस विभाग के प्रोफेसर मार्टन क्रिंगलबैक कहते हैं कि जैसे ही हमारे मस्तिष्क का यह हिस्सा सक्रिय होता है, हमारे मुंह से अनायास निकल जाता है- वाह कितना प्यारा बच्चा है।

इसको तो मैं अपने पास ही रखूंगा। फिर चाहे वह कुत्ते का पिल्ला हो या फिर बिल्ली का बच्चा। यह क्यूटनेस कुछ समय के लिए हमारे दिमाग को हैक कर लेती है। यह एक न्यूरोलाॅजिकल प्रतिक्रिया है। ऑर्बिटोफ्रॉन्स्टल कॉर्टेक्स न केवल हमें निर्णय लेने की ताकत देता है, बल्कि हमें नई जानकारी सिखाता भी है।

कौन सा चेहरा आपको कितना क्यूट लग रहा, हम बता सकते हैं
प्रो. क्रिंगलबैक कहते हैं कि हजारों साल से हमारी प्रजाति विकसित हो रही है। कुछ जानवर पैदा होते ही उठ जाते हैं, जबकि इंसानों के साथ ऐसा नहीं है। धीमी गति से देखभाल हमारी दिमाग की संरचना और क्षमता को बढ़ाता है। हमने क्यूटनेस को नापने के लिए नई मस्तिष्क स्कैनिंग की नई तकनीक विकसित की। इसके जरिए न्यूरोइमेजिंग यानी चुंबकीय क्षेत्रों का उपयोग कर मिली सेकंड से दिमाग की हरकतों की मैपिंग की। हम क्यूटनेस रेटिंग प्रणाली तैयार करने में कामयाब रहे। अब हम बता सकते हैं कि कौन सा चेहरा आपको कितना क्यूट लग रहा है।

वैज्ञानिक बोले- क्यूटनेस हमें बेहतर इंसान बनाने में मदद कर सकती है
प्रो. क्रिंगलबैक का कहना है कि क्यूटनेस बेहतर इंसान बनाने में मदद कर सकती है। शोध से हमें यह समझने में मदद मिली है कि पेरेंट-चाइल्ड बॉन्डिंग में समस्याएं कैसे आती हैं। जैसे कि बच्चे के जन्म के बाद डिप्रेशन या एक शिशु का कटे होंठ और तालु के साथ पैदा होना। इन चीजों को बदलने से लोगों की देखभाल बाधित हो सकती है।

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