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  • If The Children Have To Be Reprimanded, Immediately Correct The Mistake By Saying ‘I Am Sorry’, Tell Them That You Are Also Unhappy With This Action.

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न्यूयॉर्क17 घंटे पहलेलेखक: जैसिका ग्रोसे

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बच्चों से कहें कि इतना गुस्सा होने पर वे खुद भी दुखी हैं, हताशा में ऐसा हो गया, बच्चों को जताएं कि इसमें उनकी गलती नहीं थी।

  • महामारी के कारण बढ़ते मानसिक-आर्थिक तनाव से धैर्य खो रहे पैरेंट्स, इस पर ध्यान देना जरूरी

आई एम सॉरी… कहने को तीन शब्द हैं, पर ये बड़ा असर कर सकते हैं, खासकर जब बात बच्चों पर बिफरने की हो। ऐसी ही घटना पिछले हफ्ते अमेरिका में हुई। जब एक कामकाजी मां घर से ऑफिस का काम कर रही थी, तब एक दिन बेटी ने उन्हें कई बार डिस्टर्ब किया। उसे स्कूल की इवेंट में एक हंट की जिम्मेदारी दी गई थी।

कभी लाल रंग के स्लीपर्स, तो कभी कंघी को लेकर जब वह चौथी बार रूम में आई तो मां ने उसे झिड़ककर गेट आउट कह दिया। बेटी दुखी हो गई। मां ने बहुत कठोरता से ये बात कही थी, हालांकि वे कभी बच्चों से इस लहजे में बात नहीं करतीं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये सामान्य सी बात है, सभी पैरेंट्स के साथ ऐसा होता है। पर जब भी ऐसा हो, आपको बच्चों से माफी मांग लेनी चाहिए। इसके अलावा आप इन तीन बिंदुओं पर अमल कर सकते हैं।

अपनी गलती मानें

न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी में क्लीनिकल सायकोलॉजी की प्रोफेसर जेनी हडसन कहती हैं कि जब भी ऐसा हो, आप शांत होने पर तुरंत बच्चों से माफी मांग लें और अपनी भावनाएं उन्हें समझाएं। बच्चों से कहें कि इतना गुस्सा होने पर वे खुद भी दुखी हैं। हताशा में ऐसा हो गया, बच्चों को जताएं कि इसमें उनकी गलती नहीं थी। उनके साथ वॉक पर जा सकते हैं। गहरी सांस लें, उस वक्त बात करने से बचें।
खुद को वक्त दें

आप समझ नहीं पा रहे हैं कि इस स्थिति में क्या करना चाहिए तो खुद को थोड़ा वक्त दें। मनोवैज्ञानिक एलेक्जेंड्रा साक्स का कहना है कि बच्चे छोटे हैं तो उन्हें अकेले नहीं छोड़ सकते। आप किसी दोस्त को फोन पर बात कर मन हल्का कर सकते हैं।
बच्चों के स्तर पर जाकर सोचें

डॉ. साक्स के मुताबिक बच्चे भावनाओं पर काबू नहीं रख पाते, इसलिए तुरंत व्यक्त कर देते हैं। उनके स्तर पर जाकर सोचें। हम में से बहुत से लोग इस दौर से गुजर रहे हैं। महामारी ने आर्थिक, मानसिक तनाव इतना बढ़ा दिया है कि पैरेंट्स धैर्य खो देते हैं। इस स्थिति को बातचीत से ही संभाल सकते हैं।

बार-बार मजाक न उड़ाएं, बच्चों में नकारात्मकता आ सकती है: मनोचिकित्सक

जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल में मनोचिकित्सा की विशेषज्ञ डॉ. पूजा लक्ष्मिन कहना है कि बच्चों को जोर से डांटना सामान्य है। पर उनके साथ शारीरिक या भावनात्मक तौर पर बुरा बर्ताव कतई न करें। उनका बार-बार मजाक न उड़ाएं, लाड़-प्यार में कमी न करें, इससे उनमें नकारात्मकता आ सकती है। पर आप अक्सर ऐसा बर्ताव करते हैं तो यह इशारा इस ओर है कि बच्चों को आपकी देखभाल की ज्यादा जरूरत है। डॉक्टर की मदद भी ले सकते हैं।

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