डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। भाजपा-जेजेपी सरकार ने हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव पर हुई वोटिंग में जीत हासिल की है। सभी कांग्रेस विधायकों ने अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि भाजपा-जेजेपी विधायकों ने इसके खिलाफ मतदान किया। अविश्वास प्रस्ताव को 32 सदस्यों ने समर्थन दिया और 55 सदस्यों ने विरोध किया।

अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सीएम मनोहर लाल खट्टर ने विधानसभा में कहा, अविश्वास कांग्रेस की पुरानी संस्कृति है, अगर कोई बात पसंद न आए तो अविश्वास पैदा कर दीजिए। कांग्रेस संगठन के अंदर भी अविश्वास देखने को मिलता है… अविश्वास की कार्यशैली कांग्रेस को लाभ नहीं देने वाली, विश्वास ही लाभ देगा। उन्होंने कहा कि केरल में राहुल ने कहा कि वहां के लोग मुद्दे पर बात करते हैं। इसका मतलब है कि उत्तर भारत के लोग मुद्दे पर बात नहीं करते। अब यह जनता पर भी विश्वास नहीं करने लगे हैं। 

जेजेपी विधायक राम कुमार गौतम और देवेंद्र बबली, जो सरकार के खिलाफ बोल रहे थे और जेजेपी को भाजपा से समर्थन वापस लेने के लिए कह रहे थे उन्होंने भी अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। गोपाल कांडा ने भी गठबंधन का समर्थन किया और प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। बता दें कि  हरियाणा की कुल 90 विधानसभा सीटों में से अभी 88 सिटिंग विधायक हैं। अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष या विपक्ष में कुल 45 वोट होने चाहिए थे।

कांग्रेस के पास 30 विधायक हैं और सत्ता में बैठी बीजेपी के पास 40 विधायक। बीजेपी को समर्थन दे रही सहयोगी जेजेपी के पास 10 विधायक हैं। 5 निर्दलीय विधायकों ने भी सरकार को समर्थन दे रखा है। 2 निर्दलीय विधायक सरकार से समर्थन वापस ले चुके हैं। हरियाणा की गठबंधन सरकार का अविश्वास प्रस्ताव से एक दिन पहले दावा थी कि उनके पास कुल 55 विधायक हैं और आज वोटिंग में ये दावा एकदम सही नजर आया।

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