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रियाद/नई दिल्ली5 घंटे पहले

कंपनी पर हमले के बाद कच्चे तेल के दाम सालभर के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गए। सोमवार को मई डिलीवरी वाला क्रूड ऑयल 1.75 डॉलर की तेजी (+2.9%) के साथ 71.37 डॉलर प्रति बैरल हो गया। (सिम्बोलिक फोटो)

देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफे के बीच रविवार को सऊदी अरब में दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी अरामको पर हमला हो गया। हूती विद्रोहियों ने 14 ड्रोन और 8 बैलेस्टिक मिसाइल से रिफायनरी पर हमला किया। हालांकि मिसाइल को हवा में ही तबाह कर दिया गया। मिसाइल के कुछ टुकड़े रहवासी इलाके पर गिरे। अरामको को नुकसान नहीं पहुंचा।

भारतीय तेल विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों पर तत्काल असर नहीं पड़ेगा। हालांकि हमले के बाद कच्चे तेल के दाम सालभर के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गए। सोमवार को मई डिलीवरी वाला क्रूड ऑयल 1.75 डॉलर की तेजी (+2.9%) के साथ 71.37 डॉलर प्रति बैरल हो गया। कोरोना काल के बाद क्रूड का यह सबसे ऊंचा दाम है। इससे पहले 8 जनवरी 2020 को दाम 71 डॉलर पार गए थे।

जानकारों का कहना है कि वैश्विक तनाव से क्रूड 73 डॉलर तक पहुंच सकता है। ओपेक और मित्र राष्ट्रों द्वारा उत्पादन न बढ़ाए जाने की बात कहने से भी कीमतें बढ़ रही हैं। ऐसे में निकट भविष्य में तेल के दाम बढ़ सकते हैं। गौरतलब है कि भारत 80% तेल आयात करता है। सऊदी से 20% तेल खरीदता है।

भास्कर एक्सपर्ट ने कहा- एक-दो हफ्ते की उछाल से दाम पर असर नहीं

हमले से भारत पर असर?
रिफायनरी को नुकसान नहीं हुआ, इसलिए सप्लाई बाधित नहीं होगी। भारत 75% तेल एक माह की एवरेज प्राइज पर खरीदता है। एक-दो हफ्ते के रेट में उछाल से खुदरा दाम पर असर नहीं होता।

पहले कब-कब हमले हुए और दाम बढ़े?
सितंबर 2019 में हमले के बाद अरामको में उत्पादन थमा था। तब तेल की कीमतें बढ़ी थीं, लेकिन एक हफ्ते में सामान्य हो गई थीं।

नए परिदृश्य में दाम बढ़ेंगे या स्थिर रह सकते हैं?
हर रिफाइनरी में 10% फ्यूल लॉस होता है। क्रूड के दाम बढ़ेंगे तो लॉस प्राइज भी बढ़ेगी। कीमत घटने-बढ़ने में लॉस एवरेज भी मायने रखता है। कंपनियाें के मार्जिन पर फर्क पड़ेगा तो भी बोझ उपभोक्ता पर ही आएगा। चुनाव के कारण कंपनियाें का मार्जिन कम किया तो चुनाव के बाद वे लॉस एवरेज कवर करेंगी। अगर हमले इस तरह जारी रहे और रिफायनरी को नुकसान पहुंचा तो कच्चे तेल के दामों में 14 डॉलर तक इजाफा हो सकता है।

विद्रोहियों ने हमला क्यों किया?
अमेरिकी मदद नहीं मिलने से सऊदी कमजोर हो गया है। बाइडेन ने हूती को आतंकी सूची से बाहर कर दिया था। इसलिए हूती का मनोबल बढ़ गया। उन्हें ईरान मदद कर रहा है। चीन का भी समर्थन है।

क्या यह संघर्ष लंबा चल सकता है?
संघर्ष बहुत लंबा नहीं चलेगा। अमेरिका आगे नहीं आया तो सऊदी कुछ नहीं कर पाएगा। हमले बढ़ते जाएंगे। हालांकि अरामको पर हमले के कारण अमेरिका चुप नहीं बैठेगा। उसे मदद करनी ही होगी।

(विशेषज्ञ : रिटायर्ड मेजर जनरल पीके चक्रवर्ती; प्रशांत वशिष्ठ, वाइस प्रेसिडेंट, रेटिंग कंपनी इकरा)

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