• Hindi News
  • National
  • Sourav Ganguly Had Become An Icon In Bengal, The Entire Game Of Elections Will Change If He Join BJP

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

एक मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

फोटो 27 दिसंबर 2020 की है। उस दिन सौरव गांगुली ने बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ से मुलाकात की थी। इसके बाद गांगुली के बीजेपी में शामिल होने के कयास बढ़ गए।

  • 7 मार्च को PM मोदी की रैली के दौरान गांगुली हो सकते हैं बीजेपी में शामिल
  • एक्टर मिथुन चक्रवर्ती और प्रसेनजीत के भी शामिल होने के आसार

सौरव गांगुली को प्यार से दादा कहा जाता है। दादा एक तरह से उनके नाम का पर्याय हो गया है। बंगाली में दादा का मतलब होता है बड़ा भाई। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश में और खासतौर पर बंगाल में सौरव गांगुली को कितना ज्यादा पसंद किया जाता है। अब बंगाल में चुनाव से पहले माना जा रहा है कि कोलकाता में 7 मार्च को PM मोदी की रैली के दौरान गांगुली भाजपा में शामिल हो सकते हैं।

गांगुली की पॉपुलेरिटी से बीजेपी को वोट पाना आसान होगा
बीजेपी सौरव गांगुली के साथ ही बंगाल के बेहद लोकप्रिय एक्टर प्रसेनजीत और मिथुन चक्रवर्ती को भी पार्टी में लाने की कोशिश में सफल होती दिख रही है। ये भी पीएम की रैली के दौरान ही बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। यदि ये तीन नाम बीजेपी में जुड़ जाते हैं तो बंगाल का मौजूदा राजनीतिक सीन पूरी तरह बदल जाएगा, क्योंकि तीनों की ही बंगाल में बहुत बड़ी फैन फॉलोइंग है।

बीजेपी के लिए सौरव गांगुली इसलिए भी जरूरी हो जाते हैं कि, पार्टी के बाद बंगाल में अभी ऐसा कोई बेहद लोकप्रिय चेहरा नहीं है, जिसके दम पर वोट बटोरे जा सकें। सीएम बनने की रेस में सबसे आगे दिलीप घोष हैं, लेकिन उनकी पॉपुलेरिटी इन सेलेब्स जैसी नहीं है।

गांगुली साल 1996 से ही बंगाल में आइकॉन के तौर पर देखे जाने लगे थे, जब उन्होंने अपने पहले टेस्ट में शतक लगाया था। साल 2000 में भारतीय टीम के कप्तान बनने के बाद उनकी पॉपुलेरिटी कई गुना बढ़ गई। 2003 में विश्वकप जीतने के बाद वे बंगाल में सबसे बड़े आइकॉन के रूप में देखे जाने लगे। खासतौर से युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हुए। आईपीएल में केकेआर की तरफ से खेलते हुए भी उनकी यही पॉपुलेरिटी कायम रही। फिर अक्टूबर 2019 में वे BCCI के अध्यक्ष बन गए, तो इसे बंगाली गौरव के तौर देखा गया।

गांगुली की बीजेपी से नदजीकियां कई बार सामने आईं
बीजेपी से उनकी नजदीकी होने के कई संकते मिलते रहे हैं। जैसे वे, नेताजी सुभाष बोस की 125वीं जयंती पर हुए कार्यक्रम में दिखे थे, जिसकी अध्यक्षता खुद पीएम मोदी ने की थी। इसके बाद बंगाल में बीजेपी के थिंक टैंक माने जाने वाले अर्निबान गांगुली और भाजपा की कोर कमेटी के साथ भी गांगुली की फोटो सामने आई थी। पिछले साल दिसंबर में राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने भी सौरव से मुलाकात की थी। हाल ही में जब वे हॉस्पिटल में एडमिट हुए थे तो गृहमंत्री अमित शाह और पीएम मोदी ने फोन कर उनका हाल पूछा और बंगाल के भाजपा नेता उन्हें देखने हॉस्पिटल पहुंचे थे।

एक्सपर्ट ने कहा- गांगुली बीजेपी में गए तो पार्टी की जीत पक्की
ममता बनर्जी बीजेपी को लगातार बाहरी बता रही हैं। कह रही हैं कि, गुजरात या दिल्ली से कोई बंगाल को नहीं चलाएगा। ऐसे में गांगुली के आने पर बीजेपी को एक बंगाली आइकॉन मिल जाएगा। बाहरी का मुद्दा खत्म हो जाएगा। गांगुली की पॉपुलेरिटी का पार्टी को पूरे प्रदेश में फायदा होगा। रविंद्र भारती यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और चुनाव विश्लेषक डॉ. विश्वनाथ चक्रवर्ती कहते हैं, ‘गांगुली बीजेपी में शामिल होते हैं तो पार्टी की जीत पक्की है। फिर बीजेपी दो सौ से ज्यादा सीटें भी ला सकती है, क्योंकि पूरे बंगाली समाज में सौरव के लिए लोगों में बहुत प्यार और सम्मान है।

डॉ. विश्वनाथ चक्रवर्ती के मुताबिक गांगुली अगर बीजेपी में शामिल नहीं होते हैं तो पार्टी के लिए चुनाव मुश्किल नजर हो जाएंगे, क्योंकि उसके पास अभी बंगाल में ऐसा कोई लीडर नहीं है जो पॉपुलर हो, जिसकी राजनीतिक और प्रशासनिक समझ भी अच्छी हो। डॉ. चक्रवर्ती ने कहा कि सौरव का गृहमंत्री अमित शाह और पीएम मोदी से तालमेल भी अच्छा रहा है, लेकिन अभी तक उन्होंने राजनीति में आने से न तो इनकार किया है और न ही किसी पार्टी के ऑफर को माना है।

ममता के लिए मुश्किल हो जाएगी राह
तृणमूल कांग्रेस का कुनबा लगातार कम हो रहा है। शुभेंदु अधिकारी सहित तमाम नेता बीते दिनों में पार्टी छोड़कर जा चुके हैं। टीएमसी के लिए बीजेपी कितनी बड़ी चुनौती बन गई है, इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि तृणमूल ने अब लीड दिलाने वाले को-ऑर्डिनेटर्स को एक करोड़ रुपए देने की घोषणा की है। पार्टी ने कोलकाता के अपने सभी को-ऑर्डिनेटर्स को कहा है कि कैंडिडेट आपकी पसंद का हो या न हो, उसके साथ कोई मनमुटाव न रखें और कोशिश करें कि उसे आपके इलाके में लीड मिले।

इधर ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी हैं और उनके सामने संभवत शुभेंदु अधिकारी होंगे, जिनकी नंदीग्राम पर पकड़ बहुत मजबूत है। ऐसे में अगर सौरव का साथ बीजेपी को मिल जाता है तो ममता के लिए चुनाव जीतना बेहद कठिन हो जाएगा।

अभी तृणमूल बंगाल की बेटी अभियान चला रही है, लेकिन गांगुली के बीजेपी में आने के बाद तृणमूल के इस अभियान का कोई असर नहीं होगा। सौरव लोकप्रिय होने के साथ ही बेदाग छवि वाले भी हैं। एक सख्त प्रशासक भी माने जाते हैं। ऐसे में ममता बनर्जी की क्लीन छवि का तोड़ बीजेपी को मिल जाएगा।

बीजेपी मीडिया से अब भी बोलने से बच रही
भले ही सौरव का बीजेपी में शामिल होना तय माना जा रहा है, लेकिन पार्टी अब भी मीडिया के सामने इस मामले में मुंह खोलने से बचती दिखाई दे रही है। बीजेपी के चीफ स्पोक्सपर्सन शमिक भट्टाचार्य ने कहा, ‘गांगुली बहुत अच्छे खिलाड़ी हैं और बंगाल के आइकॉन हैं। उनकी अभी तबीयत खराब है इसलिए वे आराम कर रहे हैं। हमारी कामना है कि वे जल्दी स्वस्थ हों और दोबारा मैदान पर प्रैक्टिस करने के लिए उतरें, क्योंकि एक खिलाड़ी के लिए प्रैक्टिस करना बहुत जरूरी होता है।’

भट्टाचार्य का कहना है, ‘मुझे अभी इस बात की जानकारी नहीं है कि, गांगुली को पीएम की रैली के लिए इनवाइट किया गया है या नहीं, लेकिन स्वास्थ्य ठीक होने पर वे आने पर विचार करते हैं तो उनका स्वागत किया जाएगा।’

बीजेपी कह चुकी है कि CM बंगाली ही होगा
बीजेपी लगातार कह रही है कि बंगाल में पार्टी को बहुमत मिलने पर CM कोई बंगाली ही होगा। अब खबरें हैं कि बीजेपी के जीतने पर दिलीप घोष ही CM होंगे और यूपी की तर्ज पर दो डिप्टी सीएम बनाए जाएंगे। जिनमें एक सौरव गांगुली हो सकते हैं। चुनाव विश्लेषक डॉ. विश्वनाथ चक्रवर्ती कहते हैं कि बीजेपी के ज्यादातर नेता बंगाल आकर पोलराइजेशन की कोशिश कर रहे हैं। इसे बंगाल की जनता पसंद नहीं कर रही। इसी वजह से नितिन गडकरी, जेपी नड्डा, विप्लव देव की सभाओं में भीड़ लगातार कम हो रही है।

डॉ. चक्रवर्ती के मुताबिक बीजेपी अगर यहां पर गुड गवर्नेंस की बात करेगी और लोगों में कॉन्फिडेंस जगाएगी तो जरूर उसे फायदा मिल सकता है, क्योंकि राज्य में बेरोजगारी काफी ज्यादा है। राजनीतिक हत्याएं होना आम हो गया है। बंगाल के वरिष्ठ पत्रकार पुलकेश घोष के मुताबिक गांगुली बीजेपी में शामिल हो भी जाते हैं, तब भी पार्टी को जीत की गारंटी नहीं मिल सकती। वे जिस सीट पर लड़ेंगे, सिर्फ उसी सीट और उसके आसपास की सीटों पर ही असर दिखेगा। अब गांगुली क्या फैसला लेते हैं, ये अभी एक बड़ा सवाल है।

खबरें और भी हैं…

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here