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नई दिल्ली3 घंटे पहले

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ताजा नीलामी में 2,250 MHz से ज्यादा के टेलीकॉम स्पेक्ट्रम ऑफर किए गए हैं, ये स्पेक्ट्रम 7 बैंड के हैं और रिजर्व प्राइस पर इनकी कुल कीमत करीब 4 लाख करोड़ रुपए है - Dainik Bhaskar

ताजा नीलामी में 2,250 MHz से ज्यादा के टेलीकॉम स्पेक्ट्रम ऑफर किए गए हैं, ये स्पेक्ट्रम 7 बैंड के हैं और रिजर्व प्राइस पर इनकी कुल कीमत करीब 4 लाख करोड़ रुपए है

  • रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आईडिया ने स्पेक्ट्रम के लिए बोली लगाई
  • सोमवार को शुरू हुई स्पेक्ट्रम नीलामी 5 साल के बाद हो रही है

स्पेक्ट्रम नीलामी के पहले दिन सोमवार को 77,146 करोड़ रुपए की बोली मिली। यह बोली रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आईडिया की तरफ से आई है। स्पेक्ट्रम की नीलामी 5 साल के बाद हो रही है।

सोमवार को शुरू हुई ताजा नीलामी में 2,250 MHz से ज्यादा के टेलीकॉम स्पेक्ट्रम ऑफर किए गए हैं। ये स्पेक्ट्रम 7 बैंड के हैं और रिजर्व या स्टार्ट प्राइस पर इनकी कुल कीमत करीब 4 लाख करोड़ रुपए है। रिजर्व प्राइस का मतलब यह है कि इस प्राइस से कम बोली नहीं लगाई जा सकती है।

700 और 2500 MHz बैंड में कोई बोली नहीं मिली

टेलीकॉम मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पहले दिन 77,146 करोड़ रुपए मूल्य के स्पेक्ट्रम के लिए बोली मिली। लेकिन 700 और 2500 MHz बैंड में कोई बोली नहीं मिली। नीलामी मंगलवार को भी जारी रहेगी।

2016 की नीलामी में भी 700 MHz बैंड में कोई बोली नहीं मिली थी

सोमवार को 800 MHz, 900 MHz, 1800 MHz, 2100 MHz और 2300 MHz बैंड के स्पेक्ट्रम के लिए बोली मिली। सरकार ने जितने भी स्पेक्ट्रम ऑफर किए हैं, उनमें से करीब एक तिहाई स्पेक्ट्रम 700 MHz बैंड के हैं। 2016 में हुई नीलामी में भी 700 MHz बैंड के स्पेक्ट्रम के लिए कोई बोली नहीं मिली थी।

ज्यादा खर्च से बचने के लिए कंपनियों ने 700 MHz बैंड में बोली नहीं लगाई

विश्लेषकों के मुताबिक 700 MHz बैंड के स्पेक्ट्रम के लिए इसलिए बोली नहीं मिली थी, क्योंकि टेलीकॉम कंपनियां नए स्पेक्ट्रम बैंड में कारोबार नहीं फैलाना चाहती थी। ऐसा इसलिए, क्योंकि इससे नए उपकरणों पर उनके खर्च में काफी बढ़ोतरी हो जाती। दूसरा कारण यह था कि अन्य बैंड के स्पेक्ट्रम थोड़ी कम कीमत पर मिल रहे थे।

यह छठे दौर की नीलामी है

यह स्पेक्ट्रम नीलामी का छठा दौर है। इसमें 3.92 लाख करोड़ रुपए कीमत के 2,251.25 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम को नीलामी के लिए रखा गया है। इसमें मोबाइल सर्विस के लिए 7 फ्रीक्वेंसी बैंड 700 मेगाहर्ट्ज, 800 मेगाहर्ट्ज, 900 मेगाहर्ट्ज, 1800 मेगाहर्ट्ज, 2100 मेगाहर्ट्ज, 2300 मेगाहर्ट्ज और 2500 मेगाहर्ट्ज में स्पेक्ट्रम की नीलामी हो रही है।

मौजूदा नीलामी में 5G स्पेक्ट्रम शामिल नहीं है

स्पेक्ट्रम की मौजूदा नीलामी में 3300-3600 मेगाहर्ट्ज की फ्रीक्वेंसी शामिल नहीं है। यह स्पेक्ट्रम 5G सर्विस के लिए इस्तेमाल होना है। इसके लिए नीलामी बाद में आयोजित की जाएगी।

पेमेंट करने के लिए कई ऑप्शन मिलेंगे

सफल बोली लगाने वाले वालों के पास पूरी बोली की राशि का पेमेंट एक बार में करने या एक निश्चित राशि यानी 700 मेगाहर्ट्ज, 800 मेगाहर्ट्ज, 900 मेगाहर्ट्ज में जीते गए स्पेक्ट्रम के लिए 25% का पेमेंट शुरू में करने का ऑप्शन होगा। इसके अलावा बोलीदाताओं को 1800 मेगाहर्ट्ज, 2100 मेगाहर्ट्ज, 2300 मेगाहर्ट्ज और 2500 मेगाहर्ट्ज में हासिल स्पेक्ट्रम के लिए एकबारगी 50 प्रतिशत भुगतान करना होगा। बची हुई राशि का पेमेंट 2 साल की रोक के बाद अधिकतम 16 EMI में किया जा सकता है।

स्पेक्ट्रम की वैलिडिटी 20 साल

इस नीलामी में हासिल स्पेक्ट्रम की वैलिडिटी 20 साल की होगी। प्राइवेट सेक्टर की टेलीकॉम कंपनियां रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए 13,475 करोड़ रुपए की शुरुआती अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (EMD) जमा कराई है। इसमें जियो ने 10,000 करोड़ रुपए, एयरटेल ने 3,000 करोड़ रुपए और वोडाफोन आईडिया ने 475 करोड़ रुपए का EMD जमा कराया है।

क्या है स्पेक्ट्रम?

स्पेक्ट्रम, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम का छोटा रूप है। यह उस विकिरण ऊर्जा को कहते हैं, जो धरती को घेरे रहती है। हमारे टीवी के रिमोट से लेकर माइक्रोवेव ओवेन तक सभी इसी से ऑपरेट होते हैं। इस इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रैडिएशन (IMR) का मुख्य स्रोत सूर्य है। यह ऊर्जा स्टार्स और गैलेक्सी के साथ धरती के नीचे दबे रेडियोएक्टिव तत्वों से भी मिलती है।

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