यह पहला मामला है, जब अमेरिकी एजेंसी ने खुलकर इस मामले में प्रिंस सलमान का नाम लिया है।

अमेरिका के खूफिया विभाग ने अपनी एक रिपोर्ट में खुलासा किया है कि पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या को अंजाम देने की मंजूरी सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने दी थी। शुक्रवार को जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया कि प्रिंस सलमान की सहमति मिलने के बाद ही अधिकारियों ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया था। टर्की के शहर इस्तांबुल में खशोगी की हत्या की गई थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पत्रकार की हत्या के कुछ दिनों बाद ही अमेरिकी खूफिया एजेंसी इस निष्कर्ष तक पहुंच गई थी। हालांकि, प्रिंस सलमान हमेशा खशोगी की हत्या में शामिल होने के आरोप को नकारते आए हैं। रिपोर्ट सामने आने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन पर सऊदी के खिलाफ एक्शन लेने का दबाव बन सकता है। बाइडेन इस हत्याकांड में शामिल रहे सऊदी अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंध लगा सकते हैं। हालांकि, प्रिंस सलमान पर किसी तरह का प्रतिबंध लगाने की बात सामने नहीं आई है। क्योंकि ऐसा करने पर दोनों देशों के रिश्तों में दरार आ सकती है।

यह रिपोर्ट जो बाइडेन और क्राउन प्रिंस के बीच फोन पर हुई बात के बाद जारी हुई है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने बातचीत की जो रिपोर्ट जारी की थी, उसमें पत्रकार की हत्या से जुड़े मामले का जिक्र कहीं भी नहीं था। रिपोर्ट में कहा गया था कि दोनों नेताओं के बीच सहभागिता और आपसी रिश्तों पर चर्चा हुई है। सऊदी की प्रेस एजेंसी ने जारी रिपोर्ट में भी खशोगी की मौत का कोई जिक्र नहीं है। एजेंसी का दावा था कि दोनों के बीच स्थानीय मुद्दों और यमन में चल रहे युद्ध पर बात हुई।

शादी के लिए जरूरी कागज लेने सऊदी दूतावास गए थे खशोगी

जमाल खशोगी के पास अमेरिका की नागरिकता थी। वह वॉशिंगटन पोस्ट में क्राउन प्रिंस और उनकी नीतियों के खिलाफ लगातार कॉलम लिखा करते थे। खशोगी अपनी शादी के सिलसिले में कुछ जरूरी कागजात लेने के लिए टर्की में सऊदी दूतावास पहुंचे थे, जहां उसकी हत्या कर दी गई थी। एक दर्जन से ज्यादा सऊदी अफसरों की मौजूदगी में खशोगी की मौत हुई थी, जो उसके आने से ठीक पहले वहां पर इकट्ठे हुए थे।

सिक्योरिटी कैमरों ने खशोगी और उसकी हत्या के आरोपियों के रास्ते ट्रैक किए थे। टर्की कैमरे में एक फॉरेन्सिक शॉ की आवाज भी रिकॉर्ड की गई है, जो सऊदी के कर्नल ने बनाया था। यह कर्नल फॉरेन्सिक एक्सपर्ट भी था। सऊदी दूतावास में जाने के एक घंटे के अंदर उसका शव भी वहां से गायब कर दिया गया था।

साल 2019 में सऊदी प्रिंस ने घटना की जिम्मेदारी ली थी, पर उनका कहना था कि उन्होंने अपने अफसरों को ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था। यह कार्रवाई कुछ गैर जिम्मेदार अफसरों ने की थी। इस घटना के लिए 8 लोगों को दोषी ठहराया गया था और उन्हें 20 साल जेल की सजा भी सुनाई गई थी। हालांकि, अपराधियों के नाम उजागर नहीं किए गए थे।

 

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