इिक्वटी के मामले में दुनिया के सबसे सफल निवेशक माने जाते हैं वॉरेन बफेट।

पिछले एक साल से सोने की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के बीच दुनिया के सबसे सफल निवेशकों में से एक वॉरेन बफेट ने अपनी पूरी गोल्ड होल्डिंग बेच दी है। उनकी कंपनी बर्कशायर हैथवे ने रेगुलेटरी फाइलिंग में यह जानकारी दी है। बर्कशायर हैथवे ने 2020 की चौथी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के बीच सोने की ईंटें बेचीं। कंपनी ने तीसरी तिमाही में भी कुछ गोल्ड होल्डिंग निकाली थी।

बफेट ने पिछले साल गर्मियों के सीजन में जब सोना खरीदा था, उस दौरान सोने की कीमत 2,065 डॉलर प्रति आउंस (28.35 ग्राम) थी। बफेट की कंपनी ने चौथी तिमाही में सोने की बिक्री तब शुरू की, जब सोने की कीमत 1,800 डॉलर प्रति आउंस से नीचे आ गई यानी इस निवेश से 12.8 फीसदी नुकसान हुआ। बफेट की कंपनी ने जब सोने में निवेश शुरू किया था, तभी से उन्हें जानने वाले हैरत में थे।

कारण यह है कि बफेट सोने को लेकर नकारात्मक नजरिए के लिए जाने जाते हैं। 1998 में बफेट ने अपने लेक्चर में सोने को बेकार चीज करार दी थी। उन्होंने कहा था इसका कोई व्यावहारिक इस्तेमाल नहीं है। मैक्स कीसर जैसे विश्लेषकों ने सोने में निवेश को बफेट की निवेश रणनीति में 360 डिग्री का बदलाव करार दिया था। सोशल मीडिया पोस्ट में उनकी टिप्पणी थी, बफेट बैंकों के शेयर बेचकर सोना खरीद रहे हैं। यह उनके रुख में संपूर्ण बदलाव है। वे करें भी तो क्या करें। केंद्रीय बैंक लाखों डॉलर की करेंसी प्रिंट कर रहे हैं और पैसे की वैल्यू घटा रहे हैं।

दूसरी बड़ी कंपनियां भी बेच रहीं पास में पड़ा गोल्ड

केवल बफेट की कंपनी ही नहीं, अन्य इन्वेस्टमेंट कंपनियां भी गोल्ड पोजीशन में कटौती कर रही थीं। मसलन ब्लैक रॉक की एक रेगुलेटरी फाइलिंग से पता चलता है कि दुनिया के सबसे बड़े एसेट मैनेजर ने एसडीपीआर में करीब 3,414 करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत के गोल्ड शेयर बेचकर सिल्वर ट्रस्ट में 2.9 करोड़ डॉलर (लगभग 211 करोड़ रुपए) कीमत की हिस्सेदारी खरीदी है।

 

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