चमोली के तपोवन में NDRF, SDRF, ITBP और प्रशासन की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। चट्टान की तरह जमे मलबे के नीचे शवों की तलाश जारी है।

उत्तराखंड के चमोली में तपोवन डेम के पास जमा मलबे से शनिवार को 5 और शव निकाले गए हैं। इनके साथ ही 6 फरवरी को ग्लेशियर टूटने से हुए हादसे में मरने वालों की संख्या 67 हो गई है। तपोवन में NTPC की टनल में तलाशी अभियान अभी भी जारी है।

रेस्क्यू टीम को आसपास जमे मलबे के नीचे भी कुछ और शव दबे होने की आशंका है। वहां लोगों को खोजने के लिए NDRF और SDRF की टीमें डॉग स्क्वॉड, दूरबीन, राफ्ट और दूसरे उपकरणों का इस्तेमाल कर रहीं हैं।

6 फरवरी को ग्लेशियर टूटने से आया था सैलाब
चमोली के तपोवन में रविवार 6 फरवरी की सुबह करीब साढ़े 10 बजे ग्लेशियर टूटकर ऋषिगंगा नदी में गिर गया था। इससे आसपास के इलाकों में बाढ़ आ गई थी। यही नदी रैणी गांव में जाकर धौलीगंगा से मिलती है इसीलिए वहां भी जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हुई। सैलाब में दो पॉवर प्रोजेक्ट और बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन का बनाया ब्रिज भी तबाह हो गया। इस आपदा में 206 लोगों के लापता होने की बात सामने आई थी। तब से अब तक लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

नदियों के जल स्तर पर लगातार निगरानी
इस बीच, SDRF ने रैणी गांव के पास ऋषिगंगा नदी में वॉटर सेंसर लगा दिया गया है। नदी में जलस्तर बढ़ने से पहले ही ये अलार्म बजने लगेगा। इसका अलार्म एक किलोमीटर की दूरी तक लोग सुन सकेंगे और समय रहते सुरक्षित स्थानों तक पहुंच जाएंगे।

इस हादसे से जुड़ी खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें..

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here