दिल्ली पुलिस ने 14 फरवरी को दिशा को अरेस्ट किया था। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, फ्राइडे फॉर फ्यूचर कैम्पेन शुरू करने वालों में शामिल दिशा ने टूलकिट का गूगल डॉक बनाकर उसे सर्कुलेट किया।

दिल्ली हाईकोर्ट में शुक्रवार को क्लामेट एक्टिविस्ट दिशा रवि मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि लोगों के निजता के अधिकार, फ्रीडम ऑफ स्पीच और देश की संप्रभुता-अखंडता में बैलेंस होना चाहिए। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह कीर बेंच ने कहा, ‘इसमें कोई संदेह नहीं है कि रेगुलेशन ऑफ कंटेंट पूरी दुनिया के लिए विवादित मुद्दा रहा है। भारत इससे अछूता नहीं है।

दिशा की ओर से दायर याचिका कर कोर्ट से मांग की थी कि दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया जाए कि वह FIR से जुड़ी कोई भी जानकारी थर्ड पार्टी को न दे, मीडिया को भी नहीं। हालांकि पुलिस ने इन आरोपों से इनकार किया है। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई 17 मार्च के लिए टाल दी।

जांच में बाधा नहीं आनी चाहिए : कोर्ट
याचिका में दिशा की ओर से कहा गया कि जांच की लीक हुई जानकारियों को लेकर दिल्ली पुलिस और मीडिया उन्हें जमकर निशाना बना रही है। सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि वह कानून के मुताबिक, प्रेस ब्रीफिंग कर सकती हैं। वहीं, मीडिया यह सुनिश्चित करेगा कि उनकी खबरें सत्यापित और प्रामाणिक स्रोतों से प्राप्त हों। संपादकीय टीमें यह सुनिश्चित करें कि प्रसारित होने वाली खबरें प्रमाणित हों। साथ चैनल संपादक अपने कंटेंट पर नियंत्रण रखें ताकि जांच में बाधा न आए।

सनसनीखेज और पूर्वाग्रही रिपोर्टिंग हुई : कोर्ट
कोर्ट ने यह भी कहा कि मीडिया यह सुनिश्चित करने में बहुत अहम भूमिका निभाता है कि कोई सनसनीखेज घटना न होने पाए, लेकिन हालिया कवरेज से पता चलता है कि उसने खुद सनसनीखेज और पूर्वाग्रही रिपोर्टिंग की है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि वह सुनिश्चित करें कि उनसे जुड़े लोग अनावश्यक या निंदा करने वाले बयान देने से बचें।

दिल्ली पुलिस पर जानकारी लीक करने का आरोप लगाया
दिशा रवि की ओर से उनके वकील सीनियर एडवोकेट अखिल सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि उन 3 न्यूज चैनलों (टीवी टूडे, टाइम्स नाउ और न्यूज-18) को निर्देश दिए जाए कि वह अपने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से उन रिपोर्ट्स को हटाए, जिन्हें दिशा की वाट्सऐप चैट होने का दावा किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच से जुड़ी ऐसी जानकारी (जो सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं हैं) को सार्वजनिक न करने का निर्देश भी दें। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने जांच की महत्वपूर्ण जानकारी मीडिया में लीक की।

पुलिस पर लगाए गए आरोप झूठे : एसवी राजू
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट से कहा कि पुलिस पर लगाए गए आरोप झूठे हैं और मामले से जुड़ी ऐसी कोई जानकारी मीडिया के साथ साझा नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि लीक हुआ संदेश 3 फरवरी का है, जबकि उसे 10 दिन बाद गिरफ्तार किया गया। उसने यह मैसेज पुलिस को बदनाम करने के इरादे से लोगों को भेजा। यह जांच एजेंसियों पर दबाव बनाने का एक सिस्टेमेटिक प्रयास है।

दिशा ने ही टूलकिट को ग्रेटा से शेयर किया था
दिल्ली पुलिस ने 14 फरवरी को दिशा को अरेस्ट किया था। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, फ्राइडे फॉर फ्यूचर कैम्पेन शुरू करने वालों में शामिल दिशा ने टूलकिट का गूगल डॉक बनाकर उसे सर्कुलेट किया। इसके लिए उन्होंने वॉट्सऐप ग्रुप बनाया था। वे इस टूलकिट की ड्राफ्टिंग में भी शामिल थीं और उन्होंने ही अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग से टूलकिट शेयर की थी।

 

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