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एम्सटर्डम16 घंटे पहले

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नीदरलैंड्स की स्टूडियो रोसेगार्दे फर्म ने खेतों में पौधों के साथ लाखों डांसिंग एलईडी लगाकर रोशनी की है। 

  • यहां के खेतों में लगाई गई हैं 3 रंग की एलईडी ताकि सूरज की रोशनी की कमी पूरी हो सके

बेहतर फसल लेने के लिए यूं तो कई तरह के पारंपरिक तरीके अपनाए जाते हैं, लेकिन पौधों को बड़ा करने के लिए रात के समय खेतों में डांसिंग लाइट लगाने के बारे में शायद ही कभी किसी ने सुना हो। नीदरलैंड्स की स्टूडियो रोसेगार्दे फर्म ने पिछले दिनों एक अलग ही किस्म का प्रयोग किया है। फर्में ने खेतों में पौधों के साथ लाखों डांसिंग एलईडी लगाकर रोशनी की है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह खास किस्म की लाइट पौधों के विकास में मदद करती है। नीदरलैंड्स में ऐसा करने के पीछे कारण यह है कि यहां ठंड और बर्फीले मौसम के साथ धुंध या कोहरा हमेशा छाया रहता है, इस कारण फसलों को सूर्य की पर्याप्त रोशनी नहीं मिल पाती।

यहां का औसत वार्षिक ताप 1.2 डिग्री सेल्सियस है। यही कारण है कि डच आर्टिस्ट डेन रुजगार्दे ने प्रयोग के तौर पर खेतों में एलईडी लगा दी ताकि पौधों को बढ़ने में मदद मिल सके। उनका यह प्रयोग सफल रहा है। रात में ये खेत लाखों जुगनुओं की तरह जगमगाते बहुत अच्छे लगते हैं।
हरे प्याज के खेतों में पर्पल, लाल और नीले रंग की लाइट का इस्तेमाल किया
नीदरलैंड्स के लेलिस्टाड शहर में शुरू किए गए डेन रुजगार्दे के लेटेस्ट प्रोजेक्ट का नाम ‘ग्रो’ है। इन्होंने हरे प्याज के विशाल खेतों में जो लाइटिंग सिस्टम लगाया है, उसमें पर्पल, लाल और नीले रंग की लाइट का इस्तेमाल किया गया है। रुजगार्दे द्वारा लगाया गया ये अनोखा इंस्टालेशन डच किसानों को प्रेरणा देने के लिए किया गया है, ताकि वे आर्टिफिशियल लाइट से आउटडोर फार्मिंग करना सीख सकें। वैसे नाइट टाइम अल्ट्रा वायलेट लाइट का इस्तेमाल ग्लास हाउस एग्रीकल्चर में काफी समय से चलता आ रहा है। खासकर उन जगहों पर जहां सूर्य की रोशनी सीधे मिलना नामुमकिन होता है।

अभी इसका इस्तेमाल छोटे पैमाने पर किया गया है। यह स्टूडियो इसी थ्योरी पर काम कर रहा है कि अल्ट्रा वायलेट लाइट पौधों को उगने में मदद करती है। इसके मुताबिक कुछ खास वेवलेंथ में अल्ट्रा वायलेट लाइट छोड़ी जाए तो वह कीटनाशकों का 50 प्रतिशत खर्च कम कर सकती है। डेन ने बताया कि यह लाइटिंग इंस्टालेशन ‘ग्रो’ प्लान अभी लेलिस्टाड के पास ही है लेकिन जल्द ही वे इसे 40 से ज्यादा देशों तक पहुंचाएंगे।

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