IT और ED के अफसरों ने सोमवार और मंगलवार को रॉबर्ट वाड्रा से पूछताछ की। वाड्रा पर बेनामी संपत्ति के लेनदेन का आरोप है।

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा से इनकम टैक्स (IT) डिपार्टमेंट और इन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) के अफसरों ने लगातार दो दिन पूछताछ की। बेनामी संपत्ति के मामले में यह पूछताछ की गई थी। वाड्रा पर मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप है। वे इस समय अग्रिम जमानत पर हैं।

वाड्रा ने बुधवार को अपने साथ हुई पूछताछ के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पूछताछ के लिए आई IT और ED की टीम मेरे ऑफिस से 23 हजार डॉक्युमेंट ले गई है। शुरुआत से अब तक हमने जो भी काम किया है वह ऑन रिकॉर्ड है। उसका टैक्स दिया गया है। उसमें कोई टैक्स चोरी नहीं की गई है। टीम ने जो भी सवाल पूछे, मैंने उनका जवाब दिया।

सोमवार को नौ घंटे चली पूछताछ
रॉबर्ट वाड्रा से सोमवार को IT और ED की टीम ने करीब 9 घंटे पूछताछ की गई थी। इस दौरान बेनामी संपत्ति मामले में उनके बयान दर्ज किए गए थे। मंगलवार दोपहर भी टीम उनके घर पहुंची थी। इससे पहले भी वाड्रा को पूछताछ के लिए बुलाया गया था, लेकिन वे कोरोना के कारण जांच में शामिल नहीं हुए थे।

2015 में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज हुआ
अभी यह साफ नहीं है कि किस मामले में वाड्रा से पूछताछ की गई। आरोप है कि वाड्रा की फर्म स्काई लाइट हॉस्पिटेलिटी ने राजस्थान के बीकानेर में जमीन खरीदी थी। ये जमीन गरीब गांववालों को बसाने के लिए थी। इस मामले में उन पर 2015 में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया गया था।

इसके अलावा 2018 में वाड्रा और हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंदर सिंह हुडा के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। आरोप है कि स्काई लाइट हॉस्पिटेलिटी ने गुड़गांव के शिकोहपुर गांव में 3.5 एकड़ जमीन DLF को काफी ऊंचे रेट पर बेची थी। तब वाड्रा ने कहा था कि उनके खिलाफ आरोप राजनीति से प्रेरित हैं।

 

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