प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 20 लाख 48 हजार ऐसे किसानों को 1 हजार 364 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया, जो योजना के लिए तय क्राइटेरिया में ही नहीं आते थे। इस बात का खुलासा राइट टू इनफॉर्मेशन (RTI) से मांगी गई जानकारी से हुआ है। यह जानकारी कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (CHRI) से जुड़े वेंकटेश नायक ने मांगी थी।

केंद्रीय कृषि मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, जिन अपात्र किसानों के पास स्कीम का पैसा पहुंचा है, उनमें दो कैटेगरी शामिल हैं। पहली में वे किसान हैं, जो इसके लिए जरूरी योग्यता नहीं रखते हैं। दूसरी कैटेगरी में ऐसे किसान हैं, जो इनकम टैक्स भरते हैं।

टैक्स भरने वाले 55% किसानों को मिला पैसा
वेंकटेश नायक के मुताबिक, RTI से मिली जानकारी में बताया गया है कि इन किसानों में से 55.58% इनकम टैक्स देते हैं। जबकि, स्कीम से ऐसे किसानों को बाहर रखा गया है। बाकी 44.41% भी योजना की जरूरी शर्तें पूरी नहीं करते।

पंजाब में ऐसे किसान सबसे ज्यादा
नायक के मुताबिक पंजाब, असम, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश में ऐसे किसानों की संख्या ज्यादा है। इस मामले में पंजाब टॉप पर है। यहां कुल 23.6% (4.74 लाख) अपात्र किसानों के खाते में रुपए भेजे गए हैं। 16.8% (3.45 लाख) किसान असम के हैं। 13.99% (2.86 लाख) महाराष्ट्र में रहते हैं।

इनके बाद गुजरात और उत्तर प्रदेश का नंबर आता है। यहां ऐसे किसान 8.05% (1.64 लाख) और 8.01% (1.64 लाख) हैं। सबसे कम सिक्किम में सिर्फ एक अयोग्य किसान का पता चला है।

2019 में शुरू हुई थी योजना
2019 में शुरू की गई इस योजना के तहत कम जमीन वाले किसानों को साल में तीन बार 2-2 हजार रुपए की मदद दी जाती है। इसका फायदा लेने के लिए किसान कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के जरिए रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इसके अलावा पटवारी, राजस्व अधिकारी और योजना के लिए राज्य सरकार की ओर से तय किए गए नोडल अधिकारी ही किसानों का रजिस्ट्रेशन कर रहे हैं।

11 करोड़ किसानों को मिला फायदा
प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना के तहत देश में अब तक करीब 11 करोड़ किसानों को फायदा हुआ है। इसको लेकर हाल ही में केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच आरोपों का दौर भी चला था। वहां ममता बनर्जी ने इस स्कीम को लागू नहीं किया था।

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2019 में शुरू की गई इस योजना के तहत कम जमीन वाले किसानों को साल में तीन बार 2-2 हजार रुपए की मदद दी जाती है।

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