कोविड से लड़ाई में द. कोरिया मॉडल बनकर उभरा था। साढ़े पांच करोड़ की आबादी वाले इस देश में अब भी 10 लाख आबादी पर 1253 केस आ रहे हैं। 31 दिसंबर की शाम दक्षिण कोरियाई फ्रीलांस पत्रकार राफेल राशिद कोरोना के दूसरे स्ट्रेन से जूझ रहे यूके से सिओल लौटे तो एयरपोर्ट पर इतनी सख्त जांच की गई कि वे 24 घंटे में एयरपोर्ट से निकल पाए। इसके उलट यूके में हीथ्रो एयरपोर्ट पर वे 5 मिनट में बाहर निकल गए थे।

जांच पर जांच : एयरपोर्ट पर 24 घंटे, घर पहुंचने पर 14 दिन का क्वारेंटाइन; रोज डेटा अपडेशन जरूरी

  • फ्लाइट में क्वारेंटाइन पेपर भरवाए। शाम 4 बजे एयरपोर्ट पर तापमान लिया।
  • मुझे केएफ-94 मास्क फेंकने को कहा। अधिक कसा ट्विन स्ट्रिप तीन लेयर केएफ-95 मास्क दिया। निगेटिव सर्टिफिकेट के बावजूद जांच की।
  • वेटिंग एरिया में और पेपर्स भरवाए।
  • इमीग्रेशन में क्वारेंटाइन एप डाउनलोड करवाया। उसमें पासपोर्ट नंबर और फोन नंबर भरे। अफसर ने पुष्टि की।
  • 2 दिन पहले यूके में करवाई निगेटिव पीसीआर टेस्ट रिपोर्ट चेक की। बस से लगेज लेने के लिए ले गए। पूरे समय सभी अफसर पीपीई किट पहने थे।
  • वहां से नेशनल क्वारेंटाइन फेसिलिटी स्टेशन ले गए। अलग बूथ में बैठाया।
  • टेस्ट के 9 घंटे बाद यानी रात 2 बजे फोन पर मैसेज मिला कि रिपोर्ट निगेटिव है। कहा गया कि यूके से आया हूं, इसलिए स्वैब सैंपल फिर देना है।
  • सुबह 4 बजे निगेटिव प्रेशर रूम ले गए। अफसर ने फिर तापमान जांचा। 10 घंटे इंतजार कराया। नाश्ता, लंच किया। निगेटिव रिपोर्ट मिली। एयरपोर्ट ले गए।
  • वहां क्वारेंटाइन टैक्सी तैयार थी। ड्राइवर-पैसेंजर के बीच प्लास्टिक शीट लगी थी। किराया 5,384 रुपए लगा।
  • शाम 4 बजे एयरपोर्ट से निकल घर पहुंच पाया। अब 14 दिन घर पर रहते हुए रोज एप पर डेटा डालना था।

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इंचियोन एयरपोर्ट पर लगा नोटिस बोर्ड।

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