पाकिस्तान में सियासी हलचल काफी तेज हो गई है। विपक्षी दलों के गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (PDM) ने प्रधानमंत्री इमरान खान से 31 दिसंबर 2020 तक इस्तीफा देने को कहा था। इमरान ने इस्तीफा नहीं दिया। अब PDM इस्लामाबाद तक लॉन्ग मार्च निकालने की तैयारी में है। इसमें लाखों लोग शामिल होंगे। तारीख का ऐलान जल्द होगा। PDM इमरान को उसी कंटेनर स्ट्रैटेजी से घेरेगा जो उन्होंने तीन साल पहले नवाज शरीफ सरकार गिराने में इस्तेमाल की थी। बहरहाल, पाकिस्तान की सियासत में क्या चल रहा है? क्या इमरान इस्तीफा देंगे? देंगे तो क्या होगा और कौन नया PM बनेगा। इन सवालों का जवाब तलाशती इस्लामाबाद से हमारे संवाददाता अब्दुल्ला जफर की ये खास रिपोर्ट….

PDM क्यों मांग रहा है इमरान से इस्तीफा
देश में महंगाई दर 11% हो चुकी है। 2018 में इमरान के सत्ता संभालने के पहले यह 4 से 6.74% के बीच थी। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के मुताबिक, विदेशी कर्ज 110 अरब डॉलर हो चुका है। देश के रहनुमा कहे जाने वाले सऊदी अरब और UAE से रिश्ते खराब हो चुके हैं। चीन और तुर्की से दोस्ती है। लेकिन, ये दोनों ही देश अमेरिका और यूरोप के निशाने पर हैं। आतंकवाद काबू करने में इमरान नाकाम रहे। यही वजह है कि पाकिस्तान अब भी FATF की ग्रे लिस्ट में है। विपक्ष इमरान को ‘U TURN PM’ बता रहा है। क्योंकि, विपक्ष में रहते हुए खान जो मुद्दे उठाते थे, उन सभी पर वे मुकर गए। यही वजह है कि इमरान से इस्तीफा मांगा जा रहा है।

कितना गंभीर है पाकिस्तान का सियासी संकट
इमरान सरकार के नजरिए और दावों को आधार मानें तो उसके सामने कोई संकट नहीं है। सरकार के अंदर सोच यही है कि PDM सिर्फ अपने कुछ नेताओं को बचाने के लिए प्रेशर पॉलिटिक्स कर रहा है और इससे सरकार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार के सूत्र बताते हैं कि PDM का आंदोलन खुद-ब-खुद खत्म हो जाएगा, क्योंकि उनके बीच गहरे मतभेद हैं। सरकार को कुछ करने की जरूरत ही नहीं है।

इमरान गए तो अगला PM कौन? क्या नए चुनाव होंगे?
फिलहाल, ये बिल्कुल नहीं लगता कि इमरान इस्तीफा देंगे। इसकी वजह यह है कि उन्हें फौज की सरपरस्ती यानी समर्थन हासिल है। यहां ये ध्यान रखिए कि इमरान ने तीन साल पहले जब 126 दिन कंटेनर पर धरना देकर नवाज सरकार गिराई थी, तब ISI चीफ जहीर-उल-हसन उनका खुला समर्थन कर रहे थे। वैसे भी यह 1950 या 60 का दौर नहीं है। अब धरने-प्रदर्शन से सरकार नहीं गिराई जा सकती।

क्या है कंटेनर स्ट्रैटेजी?
2017 में जब इमरान ने नवाज शरीफ सरकार के खिलाफ आंदोलन चलाया था तब वे शिप कंटेनर्स इस्लामाबाद तक ले आए थे। इनके ऊपर बैठकर रैलियां कीं और धरने दिए। इससे सड़कें जाम हो गईं और अवाम परेशान। विपक्ष इमरान के इसी हथियार को उन्हीं के खिलाफ इस्तेमाल करने का प्लान बना रहा है।

क्या हिंसा का खतरा भी है?
विपक्ष के आंदोलन और लॉन्ग मार्च के दौरान हिंसा का खतरा है या नहीं, इस पर कुछ नहीं कहा जा सकता। लेकिन, कोई भी विपक्षी दल हिंसा का जोखिम नहीं लेगा। क्योंकि, इससे उसकी इमेज खराब होगी। इमरान अगर इस्तीफा देंगे तो संवैधानिक तरीके से। अगर वे इस्तीफा देते हैं और विपक्ष नए चुनाव की मांग करता है तो ये कराने ही होंगे। राष्ट्रपति इस पर आखिरी फैसला लेंगे।

असली खेल फौज नहीं, ISI खेल रही है
लोग फौज की बात करते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि ISI का सबसे अहम रोल होने वाला है। फौज में मौजूद सूत्र बताते हैं कि जनरल बाजवा के रिटायरमेंट और उनकी जगह ISI चीफ जनरल फैज हमीद को कमान मिलने का इंतजार किया जा रहा है। गरीब जनता पर महंगाई के बोझ का मुद्दा बड़ा है। फौज भी यह जानती है।

फौज की पसंद और नापसंद
नवाज शरीफ की पार्टी PML-N खुले तौर पर फौज और ISI की सियासी दखलंदाजी का विरोध कर रही है। लिहाजा, उसे मिलिट्री का समर्थन नहीं मिलेगा। वर्तमान की साफ तस्वीर यह है कि PML-N घाटे में रहेगी। इमरान की पार्टी PTI पूरी तरह कन्फ्यूज है। वो खेल नहीं समझ रही।

फौज PPP के संपर्क में, बिलावल पर क्यों खेल सकती है दांव
अगर फौज ने इमरान को समर्थन देना बंद कर दिया तो बहुत बड़ा खेल देखने मिल सकता है। फौज बिलावल भुट्टो की पार्टी PPP को समर्थन देकर उन्हें प्रधानमंत्री बना सकती है। उन्हें सेना के कहने पर दूसरे दलों का समर्थन मिल सकता है। इसका इशारा इस बात से समझिए कि PDM में शामिल बाकी दलों के सांसदों और विधायकों ने तो इस्तीफे दिए, लेकिन PPP के नुमाइंदों ने ऐसा नहीं किया। ये फौज से डील की तरफ इशारा है और इसे PDM में शामिल दूसरी पार्टियां भी समझ रही हैं। आरोप है कि बिलावल और फौज की डील या तो हो चुकी है, या होने वाली है।

फौज इमरान के खिलाफ और बिलावल के फेवर में क्यों हो सकती है
इसकी वजह इमरान सरकार की वो नाकामियां हैं, जो ऊपर गिनाई जा चुकी हैं। आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि फौज को खुद अपना बजट घटाना पड़ा। अवाम का गुस्सा कम करने के लिए सरकार बदलने का लॉलीपॉप पहले भी पाकिस्तानी फौज लोगों को परोसती रही है।

इमरान गए तो भारत पर क्या असर पड़ेगा
कुछ खास नहीं। दोनों देशों के बीच गहरा तनाव है और चार साल से कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई। पुलवामा और उरी के हमलों का जवाब सर्जिकल स्ट्राइल और बालाकोट से दिया गया। क्रिकेट डिप्लोमैसी भी आकार नहीं ले सकी। कल्चरल एक्सचेंज भी बंद है। कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने के बाद तनाव ज्यादा बढ़ गया। मोदी सरकार दो टूक कह चुकी है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।

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