पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने शनिवार दोपहर मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर जकी-उर-रहमान लखवी को गिरफ्तार कर लिया। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, लखवी पर टेरर फाइनेंसिंग के आरोप हैं। हालांकि, पाकिस्तान का यह कदम दिखावे की कार्रवाई ज्यादा लगता है। इसकी वजह यह है कि अगले महीने फाइनेंशियल टास्क फोर्स (FATF) की मीटिंग होने वाली है।

पाकिस्तान लंबे वक्त से FATF की ग्रे लिस्ट में है। पिछली मीटिंग नवंबर में हुई थी। तब पाकिस्तान की सरकार ने जो रिपोर्ट पेश की थी उससे FATF संतुष्ट नहीं था। संगठन ने कहा था- पाकिस्तान सरकार ने अब भी कई शर्तों को पूरा नहीं किया है। टेरर फाइनेंसिंग पर जो भी कार्रवाई की गई है उसके सबूत देने होंगे। माना जा रहा है कि लखवी की कार्रवाई इसी दबाव के चलते और FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर आने के लिए की गई है।

हर महीने डेढ़ लाख रुपए देती है पाकिस्तान सरकार
मुंबई हमलों की साजिश रचने वाले आतंकी सरगना जकीउर रहमान लखवी को पाकिस्तान की इमरान खान सरकार खर्च के लिए हर महीने डेढ़ लाख रुपए देगी। पाकिस्तान सरकार ने यूनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) से लखवी को मानवीय आधार पर खर्च देने की अपील की थी। UNSC ने इसे मंजूर कर लिया। लखवी के अलावा पूर्व न्यूक्लियर इंजीनियर महमूद सुल्तान बशीरुद्दीन को भी यह रकम मिलेगी। हाफिज सईद पहले ही इस सुविधा का लाभ ले रहा है। लखवी संयुक्त राष्ट्र की आतंकी सूची में शामिल है। संयुक्त राष्ट्र ने उसकी प्रॉपर्टीज भी सीज कर रखी हैं।

क्या है नियम
सिक्योरिटी काउंसिल ने प्रतिबंधित आतंकियों और आतंकी संगठनों पर कुछ नियम बनाए हैं। अगर वे जेल में हैं तो उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए खर्च दिया जा सकता है। इमरान सरकार इसी नियम का फायदा उठा रही है।

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जकी-उर-रहमान लखवी आतंकी लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर है। वो पहले भी गिरफ्तार किया जा चुका है। लेकिन, हर बार उसे रिहा कर दिया गया। (फाइल)

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